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mahabharat 3.19.6: मैं दारुक का पुत्र हूँ और उसने मुझे रथ चलाने की कला सिखाई है। देखो! अब मैं राजा शाल्व की इस प्रसिद्ध सेना में निर्भय होकर प्रवेश करता हूँ।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.19.6 
दारुकेणाहमुत्पन्नो यथावच्चैव शिक्षित:।
वीतभी: प्रविशाम्येतां शाल्वस्य प्रथितां चमूम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैं दारुक का पुत्र हूँ और उसने मुझे रथ चलाने की कला सिखाई है। देखो! अब मैं राजा शाल्व की इस प्रसिद्ध सेना में निर्भय होकर प्रवेश करता हूँ।॥6॥
 
'I am the son of Daruka and he has taught me the art of charioteering. Look! Now I enter this famous army of King Shaalva without any fear.'॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)