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mahabharat 3.19.5: हे सात्वतवीरों में श्रेष्ठ केशवनंदन के पुत्र! अब जब भगवान की कृपा से आप सचेत हो गए हैं, तो कृपया देखिए कि मैंने घुड़सवारी की कितनी उत्तम शिक्षा प्राप्त कर ली है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.19.5 
स त्वं सात्वतमुख्याद्य लब्धसंज्ञो यदृच्छया।
पश्य मे हयसंयाने शिक्षां केशवनन्दन॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे सात्वतवीरों में श्रेष्ठ केशवनंदन के पुत्र! अब जब भगवान की कृपा से आप सचेत हो गए हैं, तो कृपया देखिए कि मैंने घुड़सवारी की कितनी उत्तम शिक्षा प्राप्त कर ली है।॥5॥
 
'O son of Kesavanandan, the foremost among the Satvataveera (virtues), now that by the grace of God you have become conscious, please see what excellent training I have received in the art of horse-riding. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)