Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.19.13-16: महाबाहु! परंतु दारुककुमार ने बाणों के वेगशाली प्रहार की चिन्ता न करके रथ को आगे बढ़ाया और दाहिनी ओर शाल्व की सेना का संहार करने लगा। वीर! तब सौभराज शाल्व ने मेरे पुत्र रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्न पर पुनः अनेक प्रकार के बाण चलाए। शत्रुवीरों का संहार करने वाले रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्न अपने हाथों की चपलता दिखाते और मुस्कुराते हुए अपने तीखे बाणों से शाल्व के बाणों को अपने पास आने से पहले ही काट डालते थे। प्रद्युम्न द्वारा अपने बाणों को छिन्न-भिन्न होते देख सौभराज ने भयंकर राक्षसी माया का आश्रय लेकर अनेक बाण चलाए। 13-16 | mahabharat अध्याय 3.19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाबाहु! परंतु दारुककुमार ने बाणों के वेगशाली प्रहार की चिन्ता न करके रथ को आगे बढ़ाया और दाहिनी ओर शाल्व की सेना का संहार करने लगा। वीर! तब सौभराज शाल्व ने मेरे पुत्र रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्न पर पुनः अनेक प्रकार के बाण चलाए। शत्रुवीरों का संहार करने वाले रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्न अपने हाथों की चपलता दिखाते और मुस्कुराते हुए अपने तीखे बाणों से शाल्व के बाणों को अपने पास आने से पहले ही काट डालते थे। प्रद्युम्न द्वारा अपने बाणों को छिन्न-भिन्न होते देख सौभराज ने भयंकर राक्षसी माया का आश्रय लेकर अनेक बाण चलाए। 13-16
Great arms! But Darukkumar did not care about the speedy attack of the arrows and moved the chariot forward, destroying Shalva's army on the right. Brave! Then Saubharaj Shalva again shot many types of arrows at my son Rukmininandan Pradyumna. Rukmininandan Pradyumna, the slayer of enemy warriors, used to show the agility of his hands and with a smile cut off the arrows of Shalva with his sharp arrows even before they came near him. Seeing his arrows being shattered by Pradyumna, Saubharaj took the help of the terrible demonic illusion and fired many arrows. 13-16
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥