Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.19.10: महाराज! दारुकपुत्र की तीव्र गति को जानकर वे घोड़े प्रज्वलित अग्नि के समान ऐसे चल रहे थे, मानो उनके पैर धरती को छू भी नहीं रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 3.19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 19: प्रद्युम्नके द्वारा शाल्वकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.19.10 
ते हस्तलाघवोपेतं विज्ञाय नृप दारुकिम्।
दह्यमाना इव तदा नास्पृशंश्चरणैर्महीम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! दारुकपुत्र की तीव्र गति को जानकर वे घोड़े प्रज्वलित अग्नि के समान ऐसे चल रहे थे, मानो उनके पैर धरती को छू भी नहीं रहे हों।
 
Maharaj! Realising the swift movement of the son of Daruk, those horses were moving like blazing fire, as if they were not even touching the ground with their feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)