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mahabharat 3.189.6: विप्रवर! मैं शिव, चन्द्रमा, प्रजापति कश्यप, दाता, सृष्टिकर्ता और यज्ञ हूँ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.189.6 
अहं शिवश्च सोमश्च कश्यपोऽथ प्रजापति:।
अहं धाता विधाता च यज्ञश्चाहं द्विजोत्तम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! मैं शिव, चन्द्रमा, प्रजापति कश्यप, दाता, सृष्टिकर्ता और यज्ञ हूँ॥6॥
 
Vipravara! I am Shiva, the moon, Prajapati Kashyap, the giver, the creator and the sacrifice. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)