Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.189.59: नरश्रेष्ठ! तब पूज्य श्रीकृष्ण ने भी उन सबका सत्कार किया और अत्यन्त मधुर सान्त्वनापूर्ण वचनों द्वारा उन्हें सब प्रकार से आश्वस्त किया॥59॥ | mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चैतान् पुरुषव्याघ्र साम्ना परमवल्गुना।
सान्त्वयामास मानार्हो मन्यमानो यथाविधि॥ ५९॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! तब पूज्य श्रीकृष्ण ने भी उन सबका सत्कार किया और अत्यन्त मधुर सान्त्वनापूर्ण वचनों द्वारा उन्हें सब प्रकार से आश्वस्त किया॥59॥
Narashrestha! Then respected Shri Krishna also honored them all and assured them in every way with very sweet consoling words. 59॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि भविष्यकथने एकोननवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें भविष्यकथनविषयक एक सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥