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mahabharat 3.189.56: इस आदिदेवतुल्य, विजयी, पीतवस्त्रधारी, वृष्णिकवेशधारी श्रीकृष्ण को देखकर मुझे यह प्राचीन घटना स्मरण हो आती है ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.189.56 
दृष्ट्वेमं वृष्णिप्रवरं स्मृतिर्मामियमागता।
आदिदेवमयं जिष्णुं पुरुषं पीतवाससम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इस आदिदेवतुल्य, विजयी, पीतवस्त्रधारी, वृष्णिकवेशधारी श्रीकृष्ण को देखकर मुझे यह प्राचीन घटना स्मरण हो आती है ॥56॥
 
Seeing this primal god-like, victorious, yellow-robed man, Vrishnik-clad Shri Krishna, I am reminded of this ancient incident. 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)