Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.189.54: ये महाबाहु श्रीकृष्ण, वृष्णिवंश के रत्न, वही सर्वव्यापी, अचिन्त्य स्वरूप, पुरातन पुरुष श्रीहरि हैं, जो पहले बालक रूप में मुझे दर्शन दे चुके थे। वे स्वयं यहाँ अवतरित हुए हैं और नाना प्रकार के दिव्य कृत्य करते हुए प्रतीत होते हैं॥ 54॥ | mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये महाबाहु श्रीकृष्ण, वृष्णिवंश के रत्न, वही सर्वव्यापी, अचिन्त्य स्वरूप, पुरातन पुरुष श्रीहरि हैं, जो पहले बालक रूप में मुझे दर्शन दे चुके थे। वे स्वयं यहाँ अवतरित हुए हैं और नाना प्रकार के दिव्य कृत्य करते हुए प्रतीत होते हैं॥ 54॥
This mighty-armed Sri Krishna, the jewel of the Vrishni clan, is the same omnipresent, inconceivable form, ancient man Sri Hari who had appeared to me earlier in the form of a child. He himself has incarnated here and appears to be performing various divine acts.॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥