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mahabharat 3.189.51: हे भरतकुल के गौरव और समस्त पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर! जब प्रलयकाल आया, तब मुझे यह अद्भुत अनुभव हुआ ॥51॥   |   mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.189.51 
एवं दृष्टं मया राजंस्तस्मिन् प्राप्ते युगक्षये।
आश्चर्यं भरतश्रेष्ठ सर्वधर्मभृतां वर॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतकुल के गौरव और समस्त पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर! जब प्रलयकाल आया, तब मुझे यह अद्भुत अनुभव हुआ ॥51॥
 
Yudhishthira, the pride of the Bharat clan and the best among all the virtuous souls! When the time of doomsday came, I had this astonishing experience. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)