Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.189.46-47: हे ब्रह्मर्षि! इस प्रकार मैंने तुम्हें अपना वास्तविक स्वरूप बताया है, जिसे जानना देवताओं और दानवों के लिए भी कठिन है। जब तक महातपस्वी भगवान ब्रह्मा जागृत न हो जाएँ, तब तक तुम श्रद्धा और विश्वास के साथ सुखपूर्वक निवास करो। ॥46-47॥ | mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आख्यातस्ते मया चात्मा दुर्ज्ञेयो हि सुरासुरै:॥ ४६॥
यावत् स भगवान् ब्रह्मा न बुध्येत महातपा:।
तावत् त्वमिह विप्रर्षे विश्रब्धश्चर वै सुखम्॥ ४७॥
अनुवाद
हे ब्रह्मर्षि! इस प्रकार मैंने तुम्हें अपना वास्तविक स्वरूप बताया है, जिसे जानना देवताओं और दानवों के लिए भी कठिन है। जब तक महातपस्वी भगवान ब्रह्मा जागृत न हो जाएँ, तब तक तुम श्रद्धा और विश्वास के साथ सुखपूर्वक निवास करो। ॥46-47॥
O Brahmarshi! Thus have I explained to you my true nature, which is difficult to know even for the gods and demons. Until the great ascetic Lord Brahma awakens, you must continue to live happily with faith and trust. ॥ 46-47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥