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mahabharat 3.189.24: जो ब्राह्मण वेदों का भली-भाँति अध्ययन करके, शान्त मन से तथा क्रोधरहित होकर नाना प्रकार के यज्ञों द्वारा मेरी पूजा करते हैं, वे ही मुझे प्राप्त कर सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.189.24 
सम्यग् वेदमधीयाना यजन्ते विविधैर्मखै:।
शान्तात्मानो जितक्रोधा: प्राप्नुवन्ति द्विजातय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण वेदों का भली-भाँति अध्ययन करके, शान्त मन से तथा क्रोधरहित होकर नाना प्रकार के यज्ञों द्वारा मेरी पूजा करते हैं, वे ही मुझे प्राप्त कर सकते हैं।
 
Only those Brahmins who, having studied the Vedas well and with a tranquil mind and without anger worship me by performing various kinds of sacrifices, can attain me. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)