Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.189.2: हे ब्रह्मर्षि! तुम पिता के भक्त हो, मेरी शरण में आये हो और तुमने उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन किया है। इन सब कारणों से तुमने मेरा वास्तविक रूप देखा है॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पितृभक्तोऽसि विप्रर्षे मां चैव शरणं गत:।
ततो दृष्टोऽस्मि ते साक्षाद् ब्रह्मचर्यं च ते महत्॥ २॥
अनुवाद
हे ब्रह्मर्षि! तुम पिता के भक्त हो, मेरी शरण में आये हो और तुमने उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन किया है। इन सब कारणों से तुमने मेरा वास्तविक रूप देखा है॥ 2॥
O Brahmarshi! You are a devotee of your father, you have come to me for refuge and you have observed great celibacy. Due to all these reasons, you have seen my true form.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥