Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.189.11-13: हे ब्राह्मण! पूर्वकाल में जब यह पृथ्वी जल में डूबी हुई थी, तब मैंने वराह रूप धारण करके इसे बलपूर्वक जल से बाहर निकाला था। हे विद्वान्! मैं विशाल मुख वाला अग्निस्वरूप होकर सदैव समुद्र का जल पीता हूँ और फिर वर्षा करता हूँ। ब्राह्मण मेरे मुख हैं, क्षत्रिय मेरी दो भुजाएँ हैं और वैश्य मेरी दो जाँघों के रूप में स्थित हैं। | mahabharat अध्याय 3.189: भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! पूर्वकाल में जब यह पृथ्वी जल में डूबी हुई थी, तब मैंने वराह रूप धारण करके इसे बलपूर्वक जल से बाहर निकाला था। हे विद्वान्! मैं विशाल मुख वाला अग्निस्वरूप होकर सदैव समुद्र का जल पीता हूँ और फिर वर्षा करता हूँ। ब्राह्मण मेरे मुख हैं, क्षत्रिय मेरी दो भुजाएँ हैं और वैश्य मेरी दो जाँघों के रूप में स्थित हैं।
O Brahmin! In the past, when this earth was submerged in water, I had taken the form of Varaah and forcefully pulled it out of the water. O scholar! I, being the big-faced fire, always drink the water of the ocean and then make it rain. Brahmins are my mouth, Kshatriyas are my two arms and Vaishyas are situated in the form of my two thighs.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥