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mahabharat 3.188.99: जब उस बालक ने ऐसा कहा, तब मुझे बड़ा दुःख हुआ और अपनी दीर्घ आयु तथा मानव शरीर से विरक्ति हो गई ॥99॥   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.188.99 
ततो बालेन तेनैवमुक्तस्यासीत् तदा मम।
निर्वेदो जीविते दीर्घे मनुष्यत्वे च भारत॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
जब उस बालक ने ऐसा कहा, तब मुझे बड़ा दुःख हुआ और अपनी दीर्घ आयु तथा मानव शरीर से विरक्ति हो गई ॥99॥
 
When that boy said this, I felt very sad and detached from my long life and human body. ॥99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)