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mahabharat 3.188.98: 'हे महर्षि! मैंने तुम्हें आशीर्वाद दिया है। मेरे शरीर में प्रवेश करो और विश्राम करो। वहाँ तुम्हारे रहने की व्यवस्था कर दी गई है।'   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.188.98 
अभ्यन्तरं शरीरे मे प्रविश्य मुनिसत्तम।
आस्स्व भो विहितो वास: प्रसादस्ते कृतो मया॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
'हे महर्षि! मैंने तुम्हें आशीर्वाद दिया है। मेरे शरीर में प्रवेश करो और विश्राम करो। वहाँ तुम्हारे रहने की व्यवस्था कर दी गई है।'
 
‘O great sage! I have blessed you. Enter my body and rest. Arrangements have been made for your stay there.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)