Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.96-97: मुझे विस्मित देखकर कमल के समान नेत्रों वाले उस तेजस्वी बालक ने मुझसे इन मधुर शब्दों में कहा - 'भृगुवंशी मार्कण्डेय! मैं तुम्हें जानता हूँ। तुम बहुत थके हुए हो और विश्राम करना चाहते हो। जब तक चाहो, यहीं बैठो।' | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुझे विस्मित देखकर कमल के समान नेत्रों वाले उस तेजस्वी बालक ने मुझसे इन मधुर शब्दों में कहा - 'भृगुवंशी मार्कण्डेय! मैं तुम्हें जानता हूँ। तुम बहुत थके हुए हो और विश्राम करना चाहते हो। जब तक चाहो, यहीं बैठो।'
Seeing me in astonishment, that radiant boy with eyes like lotus spoke to me in these pleasant words - 'Markandeya of Bhrigu lineage! I know you. You are very tired and want to rest. Sit here as long as you wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥