श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.188.90 
तत: कदाचित् पश्यामि तस्मिन् सलिलसंचये।
न्यग्रोधं सुमहान्तं वै विशालं पृथिवीपते॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तत्पश्चात् एक दिन मुझे एकार्णव नदी के गहरे जल में एक विशाल वटवृक्ष दिखाई दिया।
 
O King! Thereafter one day I saw a huge banyan tree in the deep waters of the Ekarnava.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)