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mahabharat 3.188.82: तदनन्तर वे प्रलयकाल के पयोधर महात्मा ब्रह्माजी की प्रेरणा पाकर पृथ्वी को तृप्त करने के लिए बारह वर्षों तक क्रमवार वर्षा करते हैं ॥82॥   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.188.82 
ततो द्वादशवर्षाणि पयोदास्त उपप्लवे।
धाराभि: पूरयन्तो वै चोद्यमाना महात्मना॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वे प्रलयकाल के पयोधर महात्मा ब्रह्माजी की प्रेरणा पाकर पृथ्वी को तृप्त करने के लिए बारह वर्षों तक क्रमवार वर्षा करते हैं ॥82॥
 
Thereafter, those Payodhars of the Doomsday, receiving the inspiration of Mahatma Brahmaji, send serial rains for twelve years to satiate the earth. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)