श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  3.188.81 
वर्षमाणा महत् तोयं पूरयन्तो वसुंधराम्।
सुघोरमशिवं रौद्रं नाशयन्ति च पावकम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी को डुबानेवाले वे समस्त बादल बहुत अधिक मात्रा में जल बरसाकर उस अत्यन्त भयंकर, अशुभ और भयंकर अग्नि को बुझा देते हैं ॥ 81॥
 
By pouring a great quantity of water all those clouds that submerge the earth, extinguish that extremely dreadful, inauspicious and terrible fire. ॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)