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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना
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श्लोक 80
श्लोक
3.188.80
ततस्ते जलदा घोरा राविण: पुरुषर्षभ।
सर्वत: प्लावयन्त्याशु चोदिता: परमेष्ठिना॥ ८०॥
अनुवाद
पुरुषरत्न! तत्पश्चात् प्रजापति की प्रेरणा से वे भयंकर गर्जना करने वाले बादल शीघ्रतापूर्वक सब जगह वर्षा करते हैं और सबको जल से भर देते हैं॥80॥
Purushratna! Thereafter, inspired by the Creator, those fierce roaring clouds quickly rain everywhere and flood everyone with water. 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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