श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.188.79 
तैरियं पृथिवी सर्वा सपर्वतवनाकरा।
आपूर्यते महाराज सलिलौघपरिप्लुता॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब वे वर्षा करते हैं, तब पर्वत, वन और खानों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी अनन्त जलराशि में डूब जाती है और सब ओर से भर जाती है। 79.
 
Maharaj! When they rain, the entire earth including its mountains, forests and mines gets submerged in the infinite amount of water and gets filled from all sides. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)