श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.188.78 
विद्युन्मालापिनद्धाङ्गा: समुत्तिष्ठन्ति वै घना:।
घोररूपा महाराज घोरस्वननिनादिता:।
ततो जलधरा: सर्वे व्याप्नुवन्ति नभस्तलम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
वे सभी बादल बिजली की मालाओं से सुसज्जित होकर आते हैं। महाराज! अपनी भयंकर गर्जना के कारण वे अत्यंत भयानक प्रतीत होते हैं। धीरे-धीरे वे सभी बादल सम्पूर्ण आकाश को ढक लेते हैं। 78।
 
All those clouds come around decked with garlands of lightning. Maharaj! Due to their terrifying roar they appear very terrifying. Gradually all those clouds cover the entire sky. 78.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)