श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.188.77 
केचित् पुरवराकारा: केचिद् गजकुलोपमा:।
केचिदञ्जनसंकाशा: केचिन्मकरसंनिभा:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
कुछ तो श्रेष्ठ नगरों के समान हैं, कुछ हाथियों के झुंड के समान हैं, कुछ का रंग काजल के समान है और कुछ का आकार मगरमच्छ के समान है। 77.
 
Some are like the best cities, some like herds of elephants, some are colored like kohl and some have the shape of crocodiles. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)