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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना
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श्लोक 73
श्लोक
3.188.73
सदेवासुरगन्धर्वं सयक्षोरगराक्षसम्।
ततो दहति दीप्त: स सर्वमेव जगद् विभु:॥ ७३॥
अनुवाद
इस प्रकार सर्वत्र फैलकर वह प्रज्वलित अग्नि देवता, असुर, गन्धर्व, यक्ष, नाग और राक्षसों सहित सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को भस्म कर देती है॥73॥
Thus spreading everywhere, the blazing fire consumes the entire universe including the Gods, Asuras, Gandharvas, Yakshas, Nagas and Rakshasas. 73॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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