Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.69: इसके बाद प्रलयकाल की 'संवर्तक' नामक अग्नि वायु के साथ उन समस्त लोकों में फैल जाती है, जिनका जल पहले ही सात सूर्यों द्वारा सोख लिया गया है॥69॥ | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद प्रलयकाल की 'संवर्तक' नामक अग्नि वायु के साथ उन समस्त लोकों में फैल जाती है, जिनका जल पहले ही सात सूर्यों द्वारा सोख लिया गया है॥69॥
After this, the fire of the time of doomsday called 'Samvartak' spreads with the wind to all those worlds, whose water has already been absorbed by the seven suns.॥ 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥