श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.188.67 
ततो दिनकरैर्दीप्तै: सप्तभिर्मनुजाधिप।
पीयते सलिलं सर्वं समुद्रेषु सरित्सु च॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! तत्पश्चात् सात प्रज्वलित सूर्य उदय होकर नदियों और समुद्रों का सारा जल सोख लेते हैं।
 
O Lord of men! Thereafter seven blazing suns rise and absorb all the water of the rivers and oceans. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)