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mahabharat 3.188.66: हे पृथ्वीवासी! इसी कारण पृथ्वी पर रहने वाले अधिकांश अल्पशक्तिवान प्राणी भूख से मर जाते हैं। 66।   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.188.66 
ततस्तान्यल्पसाराणि सत्त्वानि क्षुधितानि वै।
प्रलयं यान्ति भूयिष्ठं पृथिव्यां पृथिवीपते॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वीवासी! इसी कारण पृथ्वी पर रहने वाले अधिकांश अल्पशक्तिवान प्राणी भूख से मर जाते हैं। 66।
 
O Earthling! Due to this most of the creatures on Earth who have little strength die from hunger. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)