श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.188.65 
तस्मिन् युगसहस्रान्ते सम्प्राप्ते चायुष: क्षये।
अनावृष्टिर्महाराज जायते बहुवार्षिकी॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इस प्रकार जब आयु को कम करने वाले सहस्र युगों का अन्तिम भाग समाप्त हो जाता है, तब अनेक वर्षों तक वर्षा बन्द हो जाती है।
 
Maharaj! In this way, when the last part of the thousand yugas which shorten the life span ends, the rains stop for many years. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)