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mahabharat 3.188.64: महाराज! वीर पुरुषों की पत्नियाँ भी अन्य पुरुषों का आश्रय लेंगी तथा अपने पतियों के जीवित रहते हुए भी दूसरों के साथ व्यभिचार करेंगी।   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.188.64 
वीरपत्न्यस्तथा नार्य: संश्रयन्ति नरान्नृप।
भर्तारमपि जीवन्तमन्यान् व्यभिचरन्त्युत॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वीर पुरुषों की पत्नियाँ भी अन्य पुरुषों का आश्रय लेंगी तथा अपने पतियों के जीवित रहते हुए भी दूसरों के साथ व्यभिचार करेंगी।
 
King! The wives of brave men will also take shelter of other men and will commit adultery with others even while their husbands are alive. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)