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mahabharat 3.188.63: उस समय विपरीत स्वभाव वाली स्त्रियाँ अपने योग्य पतियों को भी धोखा देंगी तथा बुरे चरित्र और स्वभाव वाली हो जायेंगी और नौकरों तथा पशुओं के साथ भी व्यभिचार करेंगी। 63.   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.188.63 
विपरीतास्तदा नार्यो वञ्चयित्वार्हत: पतीन्।
व्युच्चरन्त्यपि दु:शीला दासै: पशुभिरेव च॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
उस समय विपरीत स्वभाव वाली स्त्रियाँ अपने योग्य पतियों को भी धोखा देंगी तथा बुरे चरित्र और स्वभाव वाली हो जायेंगी और नौकरों तथा पशुओं के साथ भी व्यभिचार करेंगी। 63.
 
At that time, women with contrary nature will deceive even their worthy husbands and will become of bad character and nature and will commit adultery even with servants and animals. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)