Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.188.62: महाराज! उस समय के युवकों की आयु क्षीण हो जाएगी और उनका चरित्र वृद्धों जैसा हो जाएगा तथा जो चरित्र युवकों का होना चाहिए, वह वृद्धों में प्रकट हो जाएगा ॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.188.62 
क्षीणायुषो महाराज तरुणा वृद्धशीलिन:।
तरुणानां च यच्छीलं तद् वृद्धेषु प्रजायते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय के युवकों की आयु क्षीण हो जाएगी और उनका चरित्र वृद्धों जैसा हो जाएगा तथा जो चरित्र युवकों का होना चाहिए, वह वृद्धों में प्रकट हो जाएगा ॥ 62॥
 
Maharaj! The age of the youths of that time will diminish and their character will become like that of old people and the character that should be of the youth will appear in the old people. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)