श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.188.55 
अल्पायुषो दरिद्राश्च धर्मिष्ठा मानवास्तथा।
दीर्घायुष: समृद्धाश्च विधर्माणो युगक्षये॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
अन्त समय में धर्मात्मा लोग अल्पायु और दरिद्र तथा अधर्मी लोग दीर्घायु और समृद्ध दिखाई देंगे ॥55॥
 
In the end times, righteous people will be seen short lived and poor and unrighteous people will be seen long lived and prosperous. 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)