श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.188.53 
भूयिष्ठं कूटमानैश्च पण्यं विक्रीणते जना:।
वणिजश्च नरव्याघ्र बहुमाया भवन्त्युत॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
लोग झूठे बाट-माप बनाकर बाजार में बहुत-सी वस्तुएँ बेचते रहेंगे। हे पुरुषश्रेष्ठ! उस समय के व्यापारी भी बड़े चालाक होंगे और धोखा देना जानते होंगे। 53.
 
People will keep selling a lot of goods in the market by making false weights and measures. O best of men! The traders of that time will also be very cunning and know how to deceive. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)