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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना
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श्लोक 52
श्लोक
3.188.52
तदा च पृथिवीपाल यो भवेद् धर्मसंयुत:।
अल्पायु: स हि मन्तव्यो न हि धर्मोऽस्ति कश्चन॥ ५२॥
अनुवाद
हे राजन! उस समय जो कोई धर्म में तत्पर रहेगा, उसकी आयु बहुत कम होगी; क्योंकि उस समय कोई भी धर्म टिक नहीं सकेगा॥52॥
O King! At that time, whoever remains devoted to Dharma will live a very short life; because at that time, no Dharma will be able to survive. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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