श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.188.50 
यथर्तुवर्षी भगवान्न तथा पाकशासन:।
न चापि सर्वबीजानि सम्यग् रोहन्ति भारत॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
वर्षा ऋतु के समय इन्द्रदेव भी जल नहीं बरसाएँगे। हे भारत! भूमि में बोए गए सभी बीज ठीक से अंकुरित नहीं होंगे।
 
Even Lord Indra will not rain water during the right time of rainy season. Bharat! All the seeds sown in the land will not germinate properly. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)