Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.5-6: हे ब्रह्माजी! प्रलयकाल समाप्त होने पर जब पितामह ब्रह्माजी जागते हैं, तब वायु को सब दिशाओं में फैलाकर और उसके द्वारा जल को इधर-उधर (सूखे स्थानों में) बिखेरकर ब्रह्माजी द्वारा चार प्रकार के जीव उत्पन्न होते हैं - यौवन, अण्डज, स्वेद और वनस्पति। आप ही उन्हें (सबसे पहले) स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्रह्माजी! प्रलयकाल समाप्त होने पर जब पितामह ब्रह्माजी जागते हैं, तब वायु को सब दिशाओं में फैलाकर और उसके द्वारा जल को इधर-उधर (सूखे स्थानों में) बिखेरकर ब्रह्माजी द्वारा चार प्रकार के जीव उत्पन्न होते हैं - यौवन, अण्डज, स्वेद और वनस्पति। आप ही उन्हें (सबसे पहले) स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।॥5-6॥
O sage Brahma! Then, after the period of deluge is over, when the grandfather Brahma wakes up, then by spreading the air in all directions and by means of it scattering all the water here and there (in dry places) the four kinds of creatures, namely, viviparous, oviparous, sweat-born and plant-born, are created by Brahmaji. You alone can see them clearly (first of all). ॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥