श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.188.49 
बहुपाषण्डसंकीर्णा: परान्नगुणवादिन:।
आश्रमा मनुजव्याघ्र भविष्यन्ति युगक्षये॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! युग के अंत में सभी आश्रम अनेक प्रकार के पाखण्डों से युक्त हो जाएँगे और लोग केवल दूसरों से प्राप्त अन्न का गुणगान ही करेंगे ॥ 49॥
 
O best of men! At the end of the age all the ashrams will be filled with many kinds of hypocrisy and people will only sing the praises of the food obtained from others. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)