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mahabharat 3.188.46-47h: गृहस्थ लोग व्यापार के बोझ से डरकर डाकू बन जायेंगे। ब्राह्मण लोग साधुओं का छद्म वेश धारण करके व्यापार करके जीविका चलायेंगे तथा दिखावे के लिए नख, दाढ़ी और मूँछ बढ़ा लेंगे।   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  3.188.46-47h 
करभारभयाद् भीता गृहस्था: परिमोषका:।
मुनिच्छद्माकृतिच्छन्ना वाणिज्यमुपजीविन:॥ ४६॥
मिथ्या च नखरोमाणि धारयन्ति तदा द्विजा:।
 
 
अनुवाद
गृहस्थ लोग व्यापार के बोझ से डरकर डाकू बन जायेंगे। ब्राह्मण लोग साधुओं का छद्म वेश धारण करके व्यापार करके जीविका चलायेंगे तथा दिखावे के लिए नख, दाढ़ी और मूँछ बढ़ा लेंगे।
 
Householders will become robbers out of fear of the burden of doing business. Brahmins will adopt the deceptive appearance of sages and will earn their livelihood by doing business and will grow nails, beard and moustache for false show. 46 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)