श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  3.188.43-44 
अल्पक्षीरास्तथा गावो भविष्यन्ति जनाधिप।
अल्पपुष्पफलाश्चापि पादपा बहुवायसा:॥ ४३॥
ब्रह्मवध्यानुलिप्तानां तथा मिथ्याभिशंसिनाम्।
नृपाणां पृथिवीपाल प्रतिगृह्णन्ति वै द्विजा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! युग के अंत में गौओं के थनों में दूध बहुत कम होगा। वृक्षों पर फल-फूल बहुत कम होंगे और उन पर अच्छे पक्षियों की अपेक्षा कौए अधिक बसेरा करेंगे। हे राजन! ब्राह्मण केवल उन्हीं राजाओं से दान-दक्षिणा लेंगे जो ब्रह्महत्या आदि पापों में लिप्त हैं और मिथ्याभाषी हैं। ॥43-44॥
 
O Janeshwar! In the end of the age, there will be very little milk in the udders of cows. There will be very few fruits and flowers on trees and crows will nest on them more often than good birds. O King! Brahmins will take donations and dakshina only from those kings who are involved in sins like brahmahatya (due to greed) and who are liars. ॥43-44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)