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mahabharat 3.188.40: पुरुषसिंह राजन! अन्त समय में अनेक जीव उत्पन्न होंगे। सभी प्रकार के सुगन्धित पदार्थ नाक को सुगन्धित नहीं लगेंगे। 40॥   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.188.40 
युगान्ते मनुजव्याघ्र भवन्ति बहुजन्तव:।
न तथा घ्राणयुक्ताश्च सर्वगन्धा विशाम्पते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह राजन! अन्त समय में अनेक जीव उत्पन्न होंगे। सभी प्रकार के सुगन्धित पदार्थ नाक को सुगन्धित नहीं लगेंगे। 40॥
 
Purush Singh Rajan! Many living beings will be born in the end times. All types of fragrant substances will not seem that fragrant to the nose. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)