श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.188.4 
अनन्तरिक्षे लोकेऽस्मिन् देवदानववर्जिते।
त्वमेव प्रलये विप्र ब्रह्माणमुपतिष्ठसे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! जब यह जगत् देवता, दानव और अंतरिक्ष आदि लोकों से शून्य हो जाता है, उस प्रलयकाल में तुम ही ब्रह्माजी के पास रहकर उनकी आराधना करो॥4॥
 
O Brahman! When this world becomes void of gods, demons and the worlds such as space etc., during that period of deluge, you alone stay near Brahmaji and worship him. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)