श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.188.34 
विपरीते तदा लोके पूर्वरूपं क्षयस्य तत्।
बहवो म्लेच्छराजान: पृथिव्यां मनुजाधिप॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब लोगों के विचार और व्यवहार इस प्रकार एक-दूसरे के विरुद्ध हो जाते हैं, तब संसार के विनाश का पूर्वाभास होने लगता है। उस समय इस पृथ्वी पर अनेक म्लेच्छ राजा राज्य करने लगते हैं। 34.
 
O Lord of men! When people's thoughts and behaviour go against each other in this manner, the precursor to the destruction of the world begins. At that time, many mlechha kings begin to rule on this earth. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)