Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.31-32h: युग के अंत में ब्राह्मण शूद्रों के कर्तव्य करते हैं और शूद्र वैश्यों की तरह धन कमाते हैं या क्षत्रियों के कर्मों से अपनी जीविका चलाते हैं। | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणा: शूद्रकर्माणस्तथा शूद्रा धनार्जका:॥ ३१॥
क्षत्रधर्मेण वाप्यत्र वर्तयन्ति गते युगे।
अनुवाद
युग के अंत में ब्राह्मण शूद्रों के कर्तव्य करते हैं और शूद्र वैश्यों की तरह धन कमाते हैं या क्षत्रियों के कर्मों से अपनी जीविका चलाते हैं।
At the end of the age the Brahmins perform the duties of the Shudras and the Shudras earn money like the Vaishyas or earn their living by the deeds of the Kshatriyas. 31 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥