श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.188.27 
क्षीणे कलियुगे चैव प्रवर्तेत कृतं युगम्।
एषा द्वादशसाहस्री युगाख्या परिकीर्त्तिता॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कलियुग के समाप्त होने पर पुनः सत्ययुग का आरम्भ होता है। इस प्रकार एक चतुर्युग बारह हजार दिव्य वर्षों का बताया गया है॥27॥
 
When Kaliyug gets over, Satyayug starts again. In this way a Chaturyug is described as consisting of twelve thousand divine years.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)