श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  3.188.24-25h 
तथा वर्षसहस्रे द्वे द्वापरं परिमाणत:॥ २४॥
तस्यापि द्विशती संध्या संध्यांशश्च तथाविध:।
 
 
अनुवाद
द्वापर का मान दो हजार दिव्य वर्ष है और उतने ही सौ दिव्य वर्ष उसके सायंकाल और सायंकाल के भाग के होते हैं (इस प्रकार कुल मिलाकर द्वापर के चौबीस सौ दिव्य वर्ष होते हैं)॥24 1/2॥
 
The value of Dwapara is two thousand divine years and the same number of hundred divine years are for its evening and evening part (thus altogether Dwapara has twenty four hundred divine years)॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)