श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  3.188.22-23h 
चत्वार्याहु: सहस्राणि वर्षाणां तत् कृतं युगम्॥ २२॥
तस्य तावच्छती संध्या संध्यांशश्च तथाविध:।
 
 
अनुवाद
एक सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्षों का कहा गया है; उसके सायंकाल और सायंकाल के भाग के भी उतने ही सौ वर्ष होते हैं (इस प्रकार सत्ययुग के दिव्य वर्षों की कुल संख्या अड़तालीस सौ होती है)।
 
One Satyayug is said to be of four thousand divine years; the same number of hundred years are for its evening and evening part (thus the total number of Satyayug divine years is forty eight hundred).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)