Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.22-23h: एक सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्षों का कहा गया है; उसके सायंकाल और सायंकाल के भाग के भी उतने ही सौ वर्ष होते हैं (इस प्रकार सत्ययुग के दिव्य वर्षों की कुल संख्या अड़तालीस सौ होती है)। | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्षों का कहा गया है; उसके सायंकाल और सायंकाल के भाग के भी उतने ही सौ वर्ष होते हैं (इस प्रकार सत्ययुग के दिव्य वर्षों की कुल संख्या अड़तालीस सौ होती है)।
One Satyayug is said to be of four thousand divine years; the same number of hundred years are for its evening and evening part (thus the total number of Satyayug divine years is forty eight hundred).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥