श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.188.2 
नैके युगसहस्रान्तास्त्वया दृष्टा महामुने।
न चापीह सम: कश्चिदायुष्मान् दृश्यते तव॥ २॥
 
 
अनुवाद
महामुनि! आपने हजारों युगों के अन्त में होने वाले महाप्रलय के अनेक दृश्य देखे हैं। इस संसार में आपके समान दीर्घायु वाला कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है॥ 2॥
 
‘Mahamuni! You have witnessed many scenes of the great deluges that occur at the end of thousands of yugas. There is no other person in this world who has lived as long as you.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)