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mahabharat 3.188.16: हे ब्राह्मण! अनेक कल्पों की उत्तम सृष्टि को केवल आपने ही अनेक बार भोगा है। सम्पूर्ण जगत में ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो आपसे ज्ञात न हो।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.188.16 
अनुभूतं हि बहुशस्त्वयैकेन द्विजोत्तम।
न तेऽस्त्यविदितं किंचित् सर्वलोकेषु नित्यदा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! अनेक कल्पों की उत्तम सृष्टि को केवल आपने ही अनेक बार भोगा है। सम्पूर्ण जगत में ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो आपसे ज्ञात न हो।॥16॥
 
O Brahmin! Only you have experienced the best creation of many kalpas many times. There is nothing in the entire world that is not known to you.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)