श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान‍्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  3.188.140 
इह भूत्वा शिशु: साक्षात् किं भवानवतिष्ठते।
पीत्वा जगदिदं सर्वमेतदाख्यातुमर्हसि॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को ग्रस लेने के बाद आप बालक रूप में यहाँ क्यों उपस्थित हैं? कृपा करके मुझे यह सब बताइए॥140॥
 
Why are you present here in the guise of a child, after consuming the entire universe? Kindly tell me all this.॥ 140॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)