Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.188.139: महाप्रभु! मेरी अपनी कोई इच्छा न होने पर भी मैं केवल आपकी इच्छा से ही आया हूँ। कमलनेत्र! मैं आपको जानना चाहता हूँ, आप परम श्रेष्ठ देव हैं॥139॥ | mahabharat अध्याय 3.188: चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निर्गतोऽहमकामस्तु इच्छया ते महाप्रभो।
इच्छामि पुण्डरीकाक्ष ज्ञातुं त्वाहमनिन्दितम्॥ १३९॥
अनुवाद
महाप्रभु! मेरी अपनी कोई इच्छा न होने पर भी मैं केवल आपकी इच्छा से ही आया हूँ। कमलनेत्र! मैं आपको जानना चाहता हूँ, आप परम श्रेष्ठ देव हैं॥139॥
‘Mahaprabhu! I have come out only because of your desire even though I had no desire of my own. Lotus-eyed! I want to know you, the most excellent deity.॥ 139॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥